Sources of learning good English

There are many sources of learning good English, some of them are-



  1. Listening to Radio News.
  2. Reading newspapers like the Hindu.
  3. Reading English Novels
  4. Chatting on EngHindi.com reagarding your listed doubts
  5. Talking to your friends for 1-2 hours daily only and only using English as a rule (see our earlier post regarding मित्र गपशप for details on it.)
  6. Seeing English Movies via Youtube etc.
  7. Reading entries of a Dictionary like Oxford’s or Cambridge’s .

We shall tell you other sources too with time.

Meanwhile you can try the above ones.

Genders in Hindi Language- For Nouns

Gender in Hindi language

 

Gender or ling(लिंग ) is the most confusing part of hindi language for a non native speaker.

 

English language only uses different pronouns(He/she) for male and female, but in Hindi language the whole sentence changes its form when the gender changes.

 

Whenever one witnesses “he” or “she” in english language, the gender of the person involved is known, but in hindi language the verbs, nouns and even adjectives change its forms in different genders.

 

lets talk about it in details

Hindi nouns are either masculine or feminine.

 

as a general thumb rule, one must keep in mind that

 




(1) Most nouns ending with ‘Aa’ in singular and ‘e’ in plural are Masculine or pull-ling

example

लड़का/लड़के –ladkaa/ladke- boy/boys

दरवाजा/दरवाजे- darwaajaa/darwaaje- door/doors

गाना/गाने – gaanaa/gaane-song/songs

 

(2) Most nouns ending with ‘ee’ in singular and ‘iyaa’/’iyaan’ in plural are feminine or stree-ling

example

लड़की/ लड़कियां – ladkii/ladkiyaan- girl/girls

खिड़की/खिड़कियाँ – khidki/khidkiyaan- window/windows

कुतिया – kutiya- bitch

 

(3)The above rules have to be supported by a general feel of the object – it’s shape, delicacy/rigidity (most important), strength etc.

example

हवा – hawaa- air (delicate, deformable)

 

(4) This is a personal observation, if there are two froms of a noun and one has more ‘number of characters’ it is most likely to be feminine.

If a noun has two forms the shorter one would generally be masculine.

शेर /शेरनी – sher-sherni (lion-lioness)

कवी/कवयित्री – kavi-kavyitri(poet-poetess)

 

(5) Please note that there is no general rule for determining gender and one learns it mostly with two basic rules

  1. memorize
  2. master with experience.

EXPRESSIONS OF SADNESS – उदासी के भाव

EXPRESSIONS OF SADNESS

उदासी के भाव

 

जेसे ख़ुशी एक प्रकार की नहीं होती और उसकी अभिव्यक्ति के लिए विभिन्न प्रकार के भावो का प्रयोग किया जाता है, वेसे ही उदासी को अभिव्यक्त करने के लिए भीअलग अलग प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया जाता है |

 

चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ शब्दों के बारे में-

 

  1. ओह नो, ओह डिअर, हेल्, हेल् नो (oh no, oh dear, hell, hell no)– जब कोई बेहद बुरी घटना घटती है, और मनुष्य बेहद बुरा महसूस करता है तब इस शब्द का प्रयोग किया जाता है | हेल् का मतलब तो नरक होता ही है, तो कुल मिलाकर अंग्रेजी में हेल् एक विस्मयादिबोधक अव्यय सा बन गया है ।

 

  1. अलास(alas)– “हाय”- दुःख दर्द दर्शाने के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जाता है | 

 

  1. ओह गॉड, ओह जीसस, डिअर लॉर्ड, एमेन (oh God, oh Jesus, dear lord, amen)– “हे भगवान”- बेहद बुरी घटना घटने पर, भगवान् को याद करने या संबोधित करने के लिए इस भाव को व्यक्त किया जाता है |

 

  1. टू बेड, शेम (too bad, shame)– जब कोई गलती हुई हो और उसके परिणामस्वरूप उदासी का भाव व्यक्त करना हो | टू बैड् का मतलब है, बहुत बुरा । और शेम् का मतलब तो शर्म है ही ।

 

  1. शिट, फ़क (shit, fuck)– कुछ बुरा हो गया हो, और उसके परिणाम का हमें डर लगे | इनमें से बाद वाला शब्द अश्लील की श्रेणी में है । वैसे शिट् शब्द अंग्रेजी में हिन्दी के “गू” शब्द के समकक्ष माना जा सकता है जो विष्ठा या मल के अर्थ में है ।

 

  1. डैम् (damn)– कुछ बुरी घटना घटी हो और बात को झेलने में या हजम करने में समय लगे | अक्सर हिन्दी-उर्दू शब्द कम्बख्त की जगह अंग्रेजी में damn का प्रयोग होता है । डैम् के और भी कई प्रयोग हैं जिन्हें हम इस ब्लॉग पर आगे आने वाले लेखों में देखेंगे ।

 

  1. पुअर, फीलिंग ब्लू, फीलिंग डाउन, फीलिंग लो (poor, feeling blue, feeling down, feeling low)– जब उदासीनता महसूस हो, तब उसे दर्शाने के लिए इस भाव का प्रयोग होता है | यानी दुःख-उदासी में जो आप बोल उठते हैं वे शब्द तो अलग ठहरे, ये वाले शब्द तो आपकी खुद की हालत को बताने के लिए हैं ।

 

  1. ओह माई गॉड (oh my God)– “हे भगवान्”- जब किस घटना को सुनके उदासी और शोक के कारण प्राण पखेरू हो जाते हैं, तब इस भाव का प्रयोग किया जाता है | 

 

उदासी और शोक को दिखाने के लिए अंग्रेजी में कुछ मुहावरे निम्नलिखित हैं |

 

  1. Cry one’s eyes out- रो रो के आँखें सूज जाना – जब इंसान दुःख में बहुत ज्यादा रोता है |

 

  1. Down in the dumps- जहन्नुम में पहुँच जाना ।

 

      3.  Heart sinks- दिल बैठ जाना – जब दुःख से इंसान का दिल डूबने लगता है 

 

  1. Lump in your throat- गला भर आना – जब दुःख से इंसान को रुलाई आ जाए

 

  1. Down in the mouth- कलेजा मुँह में आ जाना – जब मुसीबतों के कारण इंसान की दुर्गति हो जाए

 

उम्मीद है कि ये सब सीखकर आपको खुशी हुई होगी ।

लेकिन कोई भी खुशी स्थायी नहीं होती………. इसलिए उदासी के भावों को ठीक से प्रकट करना भी आना ही चाहिए !! हा हा !! लेख कैसा लगा अपने प्यारे-से कमैन्ट जरूर करें ।

 

इंग्लिश ग्रामर के बेसिक नियम

Basics of English Grammar in Hindi

 

Tense (काल) किसी भी भाषा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है । काल से पता चलता है की चर्चा किये जा रहे कार्य का समय के साथ क्या सम्बन्ध है ।




कार्य हो चुका है (भूतकाल) हो रहा है (वर्तमान काल) या  होने वाला है (भविष्यकाल)  और उसी के आधार पर वाक्य की संरचना तय की जाती है या दूसरे शब्दों में, ये जो वाक्य की संरचना देख कर (या सुनकर) लोग सहज ही जान जाते हैं कि घटना का समय क्या है, वो टेन्स के नियमों के कारण ही है ।

अंग्रेजी में तीन टेन्स(काल) होते हैं और प्रत्येक के चार प्रकार हैं –

Past tense या भूतकालसमय में बीती हुई गतिविधि के बारे में दर्शाता है।

a)    Past Simple/Indefinite या सामान्य भूतकालये भूतकाल में हुए सामान्य सत्य और आदतों को दर्शाती है

जैसे rama cried (रमा रोई )

That day, in Madison Square, there were supporters of Modi everywhere (उस दिन मेडिसन स्क्वायर में हर जगह मोदी के समर्थक थे )

b)    Past Continuous या अपूर्ण भूत कालयह बीते हुए समय में अधूरे काम को दर्शाती है।

जैसेRama was walking (रमा चल रही थी )

इस वाक्य मे चलने की प्रक्रिया चल रही है. क्रिया अपूर्ण है।

c)    Past Perfect या पूर्ण भूतकालये उन गतिविधियों को दर्शाती है जो भूतकाल में पूरी हो चुकी  है।

जैसेRama had walked yesterday after one week sickness. (एक हफ्ते की बीमारी के बाद रमा कल चली थी । )

इस वाक्य  में रमा कल चल चुकी है।

d)    Past  Perfect  Continuous या सतत पूर्ण भूतकालयह काल उन कार्यो को दर्शाता है जो समय में पहले से चल रहे थे और तब तक पूरे नहीं हुए।

जैसे Rama had been walking (रमा चल रही थी)

इस वाक्य में रमा चल रही थी, और हमे नहीं पता कि आगे क्या हुआ

Present Tense  या वर्तमान काल- जब हम समय में चल रही गतिविधि का वर्णन करते हैं तो उसे वर्तमान काल कहा जाता है।

a) Present  Indefinite या सामान्य वर्तमान कालये काल सामान्य सत्य और आदतन  विवरण देती है।

जैसे- Rama walks (रमा चलती है )

b)Present  Continuous या अपूर्ण वर्तमानयह उन गतिविधियों का विवरण करता है जो समय में चल रही हैं और पूरी नहीं हुई हैं।

जैसे-  Rama is walking (रमा चल रही है)

c) Present Perfect या पूर्ण वर्तमानयह उन गतिविधियों का विवरण करता है जो समय में पूरी हो चुकी है।

जैसे-  Rama has walked (रमा चल चुकी है )

d)    Present  Perfect  Continuous  या सतत पूर्ण वर्तमान कालयह काल उन गतिविधियों को दर्शाता है जो कुछ समय से चल रहे हैं और पूरे नहीं हुए हैं।

जैसे- Rama has been walking (रमा चल रही है )

इस वाक्य में रमा कुछ समय से चल रही है और अभी भी चल रही है।

Future Tense या भविष्य कालयह काल उन कामो की चर्चा करता है, जो अभी हुई नहीं हैं, पर आगे भविष्य में होने वाली हैं।

a)  Future Indefinite  या सामान्य भविष्य कालयह काल साधारण सत्य और आदतों की चर्चा करता है।

जैसेRama will walk  (रमा चलेगी )

b)  Future  Continuous  या अपूर्ण भविष्ययह उन गतिविधियों का वर्णन करता है जो भविष्य में होंगी और अधूरी रहेंगी, मतलब गतिविधि अपूर्ण रहेगी

जैसे- Rama  will be walking  (रमा चलती रहेगी )

इस वाक्य में हमे पता चल रहा है की रमा चलेगी, पर उसके बाद क्या होगा यह नहीं पता चल रहा।

c)  Future perfect tense  या पूर्ण भविष्ययह उन गतिविधियों का वर्णन करता है जो आने वाले  काल में पूरे हो होंगे।

जैसे- Rama shall have walked (रमा चल चुकी होगी )

d)  Future Perfect Continuous  या सतत अपूर्ण भविष्ययह उन कार्यो का वर्णन करता है जो भविष्य में कुछ समय से चल रहे होंगे पर पूरी नहीं हुए होंगे।

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अंग्रेजी सुधारने के लिए मनोरंजक उपाय- मित्र-गपशप

अपनी अंग्रेजी सुधारने की बहुत से मध्यमवर्गीय परिवार के तरुणों की इच्छा होती है ।

लेकिन ठीक मार्गदर्शन के अभाव में वे ऐसा नहीं कर पा रहे होते हैं ।

जबकि ये इतना कठिन भी नहीं है ।



यहाँ प्रस्तुत हैं कुछ उपाय ।

मेरा मानना है कि यदि आपके पास 2-4 अच्छे मित्र हैं, और एकाध मार्गदर्शक रोजाना या कुछ दिनों के अन्तराल से उपलब्ध है, तो आप ये आसानी से कर सकते हैं (मार्गदर्शक के रूप में कोई डिक्शनरी या थेसरस हो सकता है, या हमारी वेबसाइट भी) । आपको करना ये है कि प्रति दिन (या एक दिन छोड़कर) उन मित्रों के साथ एक घंटा बैठें और बातचीत करें, बातें तो मित्रों के बीच वैसे भी बहुत विषयों पर होती हैं, खास बात यहाँ ये है कि इस एक घंटे में आपको सिर्फ और सिर्फ अंग्रेजी में बात करनी है । जो भी बात आपके मन में आए बोलें लेकिन अंग्रेजी में । इससे आपकी स्पोकन अंग्रेजी तो सुधरेगी ही बोलने की कला में भी निखार आएगा ।

कई बार आपको इस मित्र-गपशप के समय ये समस्या भी आ सकती है कि आप जब अंग्रेजी बोलने लगें तो बातचीत का विषय ही न सूझे । ऐसे में आप पहले से कुछ करेन्ट अफेयर्स आदि विषयों पर एक चिट पर लिखकर रख लें । ये आपका समय बचाएगा । और हाँ इस मित्र-गपशप के समय प्रत्येक मित्र अपनी एक डायरी भी साथ रक्खें, जिसमें कि आपको लिखना है हर वो हिन्दी शब्द जिसकी अंग्रेजी आप नहीं सोच पाए या ठीक से नहीं मिल सकी । इसके अलावा हर वो अंग्रेजी शब्द जो आपके किसी मित्र ने इस्तेमाल किया लेकिन आप आपस में उसका मतलब ठीक से नहीं समझ सके । गपशप के अन्त में इन शब्दों को संभाल कर रखें और पूर्व में बताए गए मार्गदर्शक से उनका सही जवाब जानने का प्रयास करें और उसे डायरी में ही लिक्खें ।

याद कैसे करें

हर किसी की याद क्षमता भिन्न भिन्न हो सकती है । लेकिन आप सही प्रयास करके याद रख सकते हैं । आपको ये शब्द याद रखने हैं, तो आप जिस दिन बातचीत हो उसके 24 घंटे बाद उसे दोबारा पढ़ें । इसी तरह सात दिन बाद दोबारा पढ़ें । आपको ये दोहराव पर्याप्त लगेगा, अब आप पाएँगे कि आपको याद हो गया है । इसके अलावा जो शब्द सीखते जाएँ उनको आत्मसात् कर लें यानी आगे की बातचीत में बिन्दास यूज़ करें । अब बचा क्या ? बात बन चुकी है ! आपकी स्पोकन अंग्रेजी सुधर रही है ।

 

नज़ीर, मिसाल जैसों के अंग्रेजी शब्द …….

अंग्रेजी में नज़ीर या मिसाल के अर्थ में अनेक विशेष शब्द हैं ।

पहले तो आप यहाँ भी अटक सकते हैं कि ये नज़ीर आखिर क्या है ?



नज़ीर एक तरह का उदाहरण है जो आगे के लोगों के लिए भी अनुकरणीय यानी अपनाने लायक हो ।

इस शब्द का इस्तेमाल खासकर विधिशास्त्र में यानी कोर्ट-कचहरियों में होता है ।

जज, जब किसी निर्णय में ऊहापोह में हो, तब वह निर्णय लेने में पिछले ऐसे किसी केस का सहारा लेता है, जिसमें ऐसा ही मिलता-जुलता मामला आया था । और उस मामले का जो निर्णय दिया गया था, उसे ही इस मामले के लिए नज़ीर यानी पूर्व-उदाहरण कहा जाता है ।

यानी किसी का पहले किया हुआ कार्य यदि उत्कृष्ट गुणवत्ता का या गरिमामय स्तर का हो तब उसे नज़ीर कहा जायेगा ।

अंग्रेजी में इसे precedent कहा जाता है ।

इसके अलावा यदि चाचा चमकू ऐसा कारनामा करते हैं जो आगे के लिए अपनाने लायक हो जाए तो उसे हम हिन्दी में कहते हैं- चाचा चमकू ने ऐसा करके एक नज़ीर कायम की । और अंग्रेजी में-

Chacha Chamku has set a precedent by doing this.

ऐसे कारनामों का कई बार तो कहावत या मुहावरा ही बन जाता है । जैसे सचिन तेन्दुलकर को लीजिए । सचिन का अपूर्व क्रिकेट जौहर, किसी परिचय का मोहताज नहीं । कई बार आप लोग कहना चाहते हैं कि हर बच्चा एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी नहीं हो सकता, तब आप सिर्फ इतना कह देते हैं कि हर बच्चा सचिन तो नहीं हो सकता ना । यानी यहाँ सचिन एक मुहावरा बन गया या कहावत । तो ऐसे ही कारनामे को हम अंग्रेजी में proverbial act कहते हैं । जैसे- तुम्हारा कहावती प्रदर्शन देखकर सारी जनता अचम्भित थी । – Whole the public was astonished seeing your proverbial performance.

इसके बाद भी कुछ अच्छे प्रदर्शन तो इतने शानदार होते हैं कि उनकी सच्चाई पर ही सन्देह होने लगे । जैसे आज कोई कहे कि मेजर ध्यानचन्द की हॉकी स्टिक से बॉल चिपक ही जाती थी, तब लोग सोचेंगे कि इसमें कुछ गप्प भी होगी । ………. इसके आगे बढ़कर कुछ लोग तो खुद ही बात को ऐसे अन्दाज में कहेंगे कि- मेजर ध्यानचन्द की हॉकी स्टिक में चुम्बक लगी होती थी । ……… लो कर दी इन्होंने अफवाह जोड़नी शुरू । तो इसे हम ऐसी अफवाह को हिन्दी में किंवदन्ती कहते हैं और अंग्रेजी में legend और अगर किसी का प्रदर्शन इस स्तर का उत्कृष्ट हो कि किंवदन्ती लगने लगे, तब तो उसे legendary performance कहा जाता है । इसे fabled performance भी कहा जाता है । fable दरअसल काल्पनिक कहानी या विचित्र पात्रों, पशु-पक्षियों आदि के साथ बनी कहानी को कहते हैं । इस तरह से fabled का मतलब भी वैसा ही है जैसा legendary का है ।

 

धन्यवाद या साधुवाद ? कहाँ कौनसा प्रयोग सही ?

हिन्दी भाषियों के मन में कई बार ये सवाल उठता है कि धन्यवाद (Dhanyavad) और साधुवाद  (Sadhuvad) में क्या अन्तर है और कौनसा कहाँ प्रयोग करना उचित है ।

आइये इस विषय में बात करें ।




पहले तो स्पष्ट कर दें कि ये दोनों ही मूलतः संस्कृत के शब्द नहीं हैं, यानी ये शब्द इस रूप में प्राचीनकाल में नहीं थे, और ये बाद में गढ़े गए हैं । धन्यवाद शब्द English के Thanks की प्रतिध्वनि में तथा साधुवाद शब्द प्रचलित शब्द वाह-वाह के संस्कृतनिष्ठ समकक्ष के रूप में । ………….. आपको ये जानकर आश्चर्य हो सकता है, लेकिन ये सच है । हालाँकि इनकी व्याकरणगत शुद्धता पर कोई सवाल नहीं है । मतलब ये व्याकरण की दृष्टि से तो शुद्ध ही हैं । ये धन्य तथा साधु शब्द के साथ वाद शब्द का समास करने पर बने हैं ।

 

वाद का अर्थ होता है बात । जैसे-

अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादाँश्च भाषसे” – भगवद्गीता

(यानी तुमने न शोक करने योग्य बातों पर शोक किया, और प्रज्ञा के वाद (बातें) बोलते हो ।

 

तो इस हिसाब से धन्यवाद का अर्थ हुआ-

धन्य, ऐसा वाद- धन्य, ऐसे शब्द या

एक ऐसी बात जिसके जरिए किसी को धन्य कहा जाए ।

साधुवाद का अर्थ हुआ –

साधु, ऐसा वाद – साधु, ऐसे शब्द या

एक ऐसी बात जिसके जरिए किसी को साधु कहा जाए ।

 

अतः किसी को धन्यवाद कहने का अर्थ है ऐसा कहना कि वह व्यक्ति धन्य है । साधुवाद कहने का अर्थ है कि वह व्यक्ति साधु है । अब आप इस साधु का मतलब संन्यासी मत लगाइये । ये साधु शब्द सज्जन या अच्छा के लिए प्रयुक्त होता है । संस्कृत में साधु का अर्थ है अच्छा । बचपन में मैंने संस्कृत की पाठ्यपुस्तक में कुछ ऐसा वाक्य देखा था- सः कलासु साधुः – वह कलाओं में अच्छा है । अब देख लें…… इसमें संन्यासी शब्द से कोई लेना-देना नहीं है । ये बात अलग है कि संन्यासी या आध्यात्मिक रूप से समर्पित व्यक्ति को हम लोग अच्छा मानने के कारण साधु कहते हैं ।

यानी संस्कृत में जहाँ-जहाँ साधु और धन्य शब्दों का प्रयोग जहाँ करते हैं, उन्हीं-उन्हीं जगहों पर हिन्दी और आधुनिक भारतीय भाषाओं तेलुगु, कन्नड़, भोजपुरी आदि में क्रमशः साधुवाद और धन्यवाद शब्द आ गये हैं । इसी तरह तेलुगु में यहाँ धन्यवादमु शब्द का प्रयोग होता है । लेकिन हाँ, हमारा प्रश्न ये भी है, कि साधुवाद और धन्यवाद में से कहाँ किसका प्रयोग किया जाना चाहिए ।

तो भई, जब किसी की प्रशंसा करनी हो तो निश्चय ही साधुवाद शब्द उचित है, न कि धन्यवाद । लेकिन कई लोग ऐसा भी समझने लगते हैं कि धन्यवाद साधुवाद का ही अधिक फॉर्मल रूप है, और वे धन्यवाद की जगह पर भी साधुवाद शब्द का प्रयोग कर देते हैं जो अनुचित है । साधुवाद शब्द कृतज्ञता अभिव्यक्ति का वाचक नहीं है , यह केवल स्तुतिवाचक है यानी प्रशंसा का द्योतक । जैसे ये प्रयोग गलत होगा-

आपके उपकार के लिए मैं आपका साधुवाद करना चाहता हूँ ।

सही प्रयोग ये है-

आपके उपकार के लिए मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूँ ।

लेकिन हाँ, कई अवसर ऐसे होते हैं जहाँ आप धन्यवाद की जगह साधुवाद भी कह दें तो किसी कीमत पर गलती पता नहीं चल सकती, क्योंकि आप जिसको धन्यवाद देना चाहते हैं उसकी तारीफ़ भी कर ही सकते हैं, तारीफ़ यानी- वाहवाही ।

अक्सर किसी के द्वारा आपको व्यक्तिगत या निजी रूप से लाभ पहुँचाए जाने पर धन्यवाद कहना उचित है, जबकि किसी व्यक्ति द्वारा  सार्वसमाजिक लाभ पहुँचाए जाने पर यानी बहुतों का भला किए जाने पर साधुवाद कहना उचित है ।

ये भी ध्यान रहे कि आपके पास धन्यवाद शब्द के और भी विकल्प हैं-

  1. आभार – इसका सीधा मतलब है अहसान ।
  2. कृतज्ञता – इसका भी मतलब है अहसान मानना ।
  3. आपका बहुत उपकार है । – ये एक वाक्य हो गया ।
  4. मेहरबानी आपकी । – ये उर्दूप्रभावित क्षेत्रों में प्रचलित वाक्यांश हुआ ।
  5. आपकी कृपा है । – ये भी एक विकल्प है ।

आजकल कुछ और सुन्दर प्रयोग भी होने लगे हैं-

6. धन्य हैं आप – यानी ऑरिजिनल संस्कृत वाला प्रयोग

7. साधु साधु – यानी ये भी है ऑरिजिनल संस्कृत वाला प्रयोग सीधे हिन्दी में ।

तो मित्रों आप समझ गए होंगे साधुवाद और धन्यवाद का मर्म ?

शेष अगली पोस्टों पर !!

 

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