मेरी अंग्रेजी सुधार की यात्रा – पार्ट 1

प्रिय मित्रों,
आप यहाँ फ़्लूएन्ट अंग्रेजी सीखने की चाह से आया करते हैं ।
मुझे इस बात की बहुत खुशी होती है ।
आपको मैं अपनी अंग्रेजी सुधारने का सफ़र कुछ संक्षेप में बता रहा हूँ । यानी ये कि मेरी अंग्रेजी कैसे इम्प्रूव हुई । इससे होगा ये कि आपमें से जो कोई अपनी अंग्रेजी सुधारने या स्पीकिंग सुधारने को लेकर परेशान है, उसे कुछ अच्छा अनुभव मिलेगा । और शायद वह भी इस मेरी छोटी सी कहानी से फायदा पा सके ।

तो दोस्तों, बात ऐसी है कि मेरी भी स्कूल की पढ़ाई हिन्दी माध्यम में ही रही है । लेकिन ईमानदारी से कहूँ तो मुझे अपने स्कूल के दिनों में अंग्रेजी कोई कठिन विषय नहीं लगता था । हमारी वेबसाइट पर भी ऐसे दोस्त आते ही हैं जो अंग्रेजी सहित सभी सब्जेक्ट्स में बहुत तेज तर्रार हैं । बस एक ही समस्या थी, जैसा कि आपमें से ज्यादातर दोस्तों की है । वो ये कि जब बोलने की बारी आती है, तब हिन्दी में तो हम बहुत क्रियेटिव और फर्राटेदार बोल सकते हैं लेकिन अंग्रेजी की बात आते ही, टैन्स और मोडल्स में फँस कर रह जाते हैं……….. अपनी बात नहीं कह पाते हैं ।

How to solve English Speaking Problems

लेकिन मुझे पता था कि यदि बोलने के लिए माहौल मिले तो ये समस्या दूर हो सकती है ।
परन्तु माहौल ही तो नहीं मिलता था ।
देखो दोस्तों छात्र जीवन में हर नया काम शुरू करने से पहले कठिन या असंभव लगता है, लेकिन ये भी उतना ही सच है कि ज्यादातर नये और असंभव दिखने वाले काम हम छात्र जीवन में ही शुरू करते हैं । शायद सब कामों का अपना अपना समय होता है । लेकिन ऐसे छात्र जो समय आने का इन्तजार करने के बजाय खुद आगे बढ़कर काम करते हैं वो ज्यादा जल्दी सफलता पाते हैं ।
मेरे साथ क्या हुआ बताता हूँ ।…….. मैं जब कक्षा 10 में आया तब मैंने स्कूल बदला था, नये विद्यालय में पढ़ाई पर ध्यान देने वाले शिक्षक और छात्र ज्यादा थे । ऐसे में मेरा परिचय बहुत से नये दोस्तों से हुआ । ज्यादातर दोस्त ऐसे थे जो नई जानकारियाँ पाने में आगे रहते थे, और एक दूसरे के साथ स्वस्थ कॉम्पटीशन में लगे रहते थे । यहाँ कॉम्पटीशन के साथ “स्वस्थ” इसलिए लिखना जरूरी है कि इसके कारण उनकी आपसी दोस्ती में कभी खलल नहीं पड़ता दिखता था । वरना आपने ऐसे कई कॉम्पटीटर देखे होंगे (सचमुच में नहीं तो टीवी सीरियल्स या फिल्मों या ऍड फिल्मों में) जो आपस में जलते ही रहते हैं, कभी कपड़े की सफेद चमक को लेकर तो कभी पेन पेन्सिल की क्वालिटी को लेकर । ………. मुझे ये वातावरण बहुत अपूर्व लगा । धीरे धीरे मैं भी उसी सर्कल में शामिल हो गया । यही वो सर्कल था जिसने मेरी अंग्रेजी सुधारने में अनूठी मदद की ।
हमारे ब्लॉग पर आपने “मित्र गपशप” वाला आर्टिकल जरूर पढ़ा होगा ।
हाँ दोस्तों, इसी व्यक्तिगत अनुभव के कारण मैंने ये आर्टिकल यहाँ लिखा था ।

तो ये जो दोस्तों की मंडली के साथ इंग्लिश स्पीकिंग थी वो शुरू ऐसे हुई कि हम दोस्त लोग कुछ छुट्टियों में एक दूसरे के घर जाया करते थे । तब ही एक दोस्त प्रकाश ने मुझे बताया कि हम चार पाँच लोग मिलकर आदित्य के घर पर ग्रुप डिस्कशन और इंग्लिश स्पीकिंग की प्रैक्टिस करते हैं । मैंने कहा लेकिन किसी के घर पर गपशप करने से उनको समस्या नहीं होती होगी क्या ? प्रकाश ने खुशी खुशी बताया कि आदित्य के परिवार वाले एक छोटा स्कूल चलाते हैं, उसी स्कूल के जो कमरे हैं वो शाम को खाली रहते हैं, हम वहीं बड़े मजे से बैठकर ग्रुप डिस्कशन करते हैं । समस्या तो छोड़ो सिर्फ दोस्त ही दोस्त होते हैं, उल्टे अच्छा-सा लगता है । ……… मुझे आइडिया पसन्द आया । प्रकाश मुझसे एक साल जूनियर था । वह मुझसे अक्सर सूक्ष्म चीजें सीखने की कोशिश करता था, लेकिन मुझे भी उसके कुछ आइडियाज़ सचमुच भा जाते थे ।

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इसके बाद मैं साइकिल से लगभग हर दूसरे दिन वहाँ जाया करता था और सभी मिलकर डेढ़ या दो घंटे ग्रुप डिस्कशन का आनन्द लेते थे । आनन्द दोहरा था । क्योंकि प्रकाश, आदित्य, कपिल, जयालोक और असीम, ये सब के सब जी.के. (जनरल नॉलेज) में बहुत अच्छे थे, और हम लोग आपस में जो भी टॉपिक तय करते थे, उस पर आपस में न सिर्फ इंग्लिश स्पीकिंग करते थे बल्कि रोचक जानकारियों और ज्वलन्त विचारों का भी आदान-प्रदान हो जाया करता था । हम लोग टॉपिक को बोर्ड पर लिख लिया करते थे (स्कूल होने के कारण बोर्ड उपलब्ध था ही), और बारी बारी से अपने अपने विचार रखते थे । बस नियम ये था कि बोलना सिर्फ इंग्लिश में है, चाहे बात व्यक्त करने में कितनी भी दिक्कत आये ! अब जब नौबत आ ही गई थी तो हर शब्द की अंग्रेजी खंगालना हमारे लिए “मजबूरी” बन गई । बातों में कभी अवतार शब्द का प्रयोग करना पड़ा तो “incarnation” शब्द से सभी का परिचय हो गया (हाँ हम हिंदी मीडियम से पढ़े थे तो इससे पहले हम हिंदी के शब्दों से ही दहकती हुई अभिव्यक्तियाँ कर लेते थे, और अंग्रेजी के शब्द जानने का मौका ही नहीं मिलता था), कभी अश्लीलता दूर करने पर डिस्कशन हुआ तब वल्गर शब्द से परिचय हो गया । कभी कुछ ऐसे शब्द भी पता चल जाते थे जो हमको मालूम तो पहले से थे लेकिन सही जगह पर प्रयोग करने वाली चाभी गायब थी । जैसे भोले-भाले को अंग्रेजी में क्या कहियेगा ? जब ये शब्द डिस्कशन में आया तब एक दोस्त ने अचानक कहा- innocent ! हम तुरन्त समझ गए कि ये दिक्कत शब्दभंडार में कमी की नहीं थी, ये तो सही शब्द के चुनाव की चाभी गायब थी, जो अब मिल गयी थी । ऐसे कई उदाहरण हैं । dialect, accord, articulation, verbalize, deemed, verbatim, literally, intonation, collocation और न जाने क्या क्या नए शब्द सभी के शब्द भंडार में जुड़ते चले गए । एक बार अरब और बिलियन (billion) के बीच तुलना भी करनी पड़ी, तब पता चला कि अरब और बिलियन एक दूसरे के बराबर होते हैं । बहुत से शब्द मुझे पहले से आते थे, लेकिन अंग्रेजी बोलने का प्रवाह यानी flow जो अब तक गायब था, वो मित्रमंडली में जोशो-खरोश के साथ अंग्रेजी में बहस करते करते मुझे मिल ही गया । ये डिस्कशन काफी महीनों तक चला । कभी हम सबकी परीक्षाओँ के कारण बन्द भी हुआ तो दोबारा शुरू हो गया । कारण ये था कि ये किसी इंग्लिश टीचर की बोरिंग क्लास तो थी नहीं…….. दोस्तों की गपशप थी, जिसको शुरू करने के लिए किसी के कहे का इन्तजार नहीं होता है । बस पेंच इतना था कि इस गपशप की भाषा पर हमने एक कन्डीशन लगा दी थी कि वो सिर्फ इंग्लिश में होगी ! ……….. इस सीरीज़ से हमें बहुत बूस्ट मिला । इस दोस्तों की गपशप का असर हमारे इंग्लिश लेवल पर ज्यादा से ज्यादा कैसे हो, इस पर हमने बहुत सी टिप्स भी समझ ली थीं । कुछ टिप्स आपके अपने दोस्तों के ग्रुप के लिए मैं यहाँ दे देता हूँ –

1. जब आप नया नया ग्रुप डिस्कशन शुरू करते हैं तो एक दूसरे से बहुत सारे नए शब्द सीखने को मिलते हैं लेकिन कुछ हफ्तों तक डिस्कशन करते करते आपको ये लगने लगेगा कि नए शब्द नहीं आ रहे हैं पुराने ही घूम रहे हैं, तो इसका इलाज ये है कि आप सभी डिस्कशन के दिनों में घर पर भी कुछ न कुछ पढ़ते रहें । मैं और प्रकाश, जयालोक आदि घर पर ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी या वर्ड पॉवर की किताब भी शौंकिया तौर पर पढ़ते रहते थे । कुछ दोस्त इंग्लिश न्यूजपेपर पढ़ते थे, जिससे उनको रोजाना नए शब्दों और usages का इनपुट मिलता रहता था, और ग्रुप में ताजगी बनी रहती थी ।

2. कभी कभी कोई नया दोस्त ग्रुप में आना चाहे तो उसे भी ले आते थे, भले ही वो दो तीन दिन के लिए ही आ सके । इससे एक तो ग्रुप में नयापन आ जाता था, वहीं दूसरी ओर हर नए दोस्त के साथ नए शब्दों का भी इनपुट मिल जाता था ।

3. 26 जनवरी, 15 अगस्त, किसी आयोजन के दिन या किसी भी बड़े पर्व को हम लोग एक अवसर के रूप में देखते थे । क्योंकि इस दिन यूँ भी स्कूल की छुट्टी होती थी, और ऐसे दिनों पर ग्रुप डिस्कशन करने से उसी दिन के विषय में बातचीत करने का टॉपिक मिल जाता था, और बातचीत की आग चरम पर होती थी ।

4. सिर्फ इंग्लिश स्पीकिंग के बजाय, हमारी तरह जी.के. (जनरल नॉलेज) और करेन्ट अफेयर्स पर स्पीकिंग करें, इससे फायदा ये होगा कि जितने नए विषय छुएँगे उतने नए शब्द (अलग-अलग फील्ड के) बोलने पड़ेंगे, जिससे आप ज्यादा से ज्यादा शब्द सीखेंगे ।

5. ग्रुप डिस्कशन के लिए सभी दोस्त एक नोटबुक बनाएँ, उसी में अपनी बातचीत में आए नए शब्द और usages नोट करते चलें ।

इस सबसे हमारा इंग्लिश स्पीकिंग का लेवल बहुत तेजी से उन्नत हुआ ।

लेकिन एक चीज की अब भी कमी थी । अभी तक मैंने जो अंग्रेजी सीखी थी वो सिर्फ फॉर्मल थी । मानो एक टीवी कैमरे के सामने आप एक डिस्कशन पैनल को बुला लें तब जिन शब्दों को बोलेंगे, वो ही सीख सका था (जैसे आप टाइम्स नाउ के पैनल को देख सकते हैं) । यानी पब्लिक फोरम में बोलने के लिए तो काफी धार बन चुकी थी । लेकिन दिनचर्या के काम जब अटकते थे तब कई बार शब्द अटक जाता था, कि इसे बोलने का सही तरीका क्या है ? हालाँकि ये सही है कि मित्र गपशप के उन एपीसोड्स के बाद, मैं ऐसी अड़चन में भी कुछ शब्द ढूँढ लेने में सक्षम हो गया था, लेकिन जब तक स्वाभाविक नेटिव प्रयोग न आते हों तब तक कॉन्फिडेन्स कहाँ आता है ।
ये बाकी की चीज मैं कैसे सीख सका इस पर अगले आर्टिकल में कवर किया जाएगा ।
उम्मीद है आपको ये अनुभव पसन्द आया होगा ।

– Admin Hemant.

इस आर्टिकल में आए अंग्रेजी शब्दों के अर्थ जो पाठक जानना चाहते हों, वे यहाँ पढ़ें –
incarnation= अवतार, dialect = बोली, accord यानी सहमति, articulation यानी शब्दों में प्रकट करना, verbalize यानी शब्दों में बाँधना, deemed यानी माना हुआ या मान्यता प्राप्त किया हुआ, verbatim यानी शब्दशः, literally यानी अक्षरशः, intonation यानी बोलने का सुर, collocation यानी अक्सर एक साथ प्रयोग होने वाले शब्द ।

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17 thoughts on “मेरी अंग्रेजी सुधार की यात्रा – पार्ट 1

  1. Very Frist of all I would thank to hement sir, who gives us his valuable time to teach as well as I have learned so many words from him that really Improved my spoken and I was having alot of doubts which have been dispelled. Thanks sir

  2. English speaking se smbndhit bahut hi mhtvpurn jaankari share ki aapne, aapki story padhte padhte muje apni story yaad aa gai jo same to same aap jaisi hi thi,aapne bilkul sahi kaha he English speaking sikhne me group discussion-english me baatchit karna bahut hi mhtvpurn he,kyuki iske baad hi humari jeebh halchal karegi or jo dusri sabse mhtvpurn chij he vah he vocabulary build karna.

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